हरियाणा की डायरी: जब गब्बर ने आसमान में लहराई तलवार

हरियाणा की डायरी: जब गब्बर ने आसमान में लहराई तलवार

Haryana Diary

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सचित्र/संपादकीय पृष्ठ हेतु

प्रस्तुति:चन्द्र शेखर धरणी
वरिष्ठ,स्वतंत्र पत्रकार

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जब गब्बर ने आसमान में लहराई तलवार
हरियाणा की राजनीति में गब्बर, दबंग और बाबा जैसे नामों से प्रसिद्ध अनिल विज आजकल अपने एक और कार्य को लेकर चर्चा में है। दअरसल, हाल ही में अनिल विज ने अंबाला के सदर बाजार के चौराहे पर वीर महाराणा प्रताप की मूर्ति का अनावरण किया था। इस दौरान गबबर ने महाराणा प्रताप के जयकारे लगाते हुए कहा कि “चढ़ चेतक पर तलवार उठा, रखता था भूतल पानी को, राणा प्रताप सिर काट-काट, करता था सफल जवानी को”। उन्होंने कहा कि आज मेरी जिह्वा धन्य हो गई है कि उन्हें उस महामानव हिंद केसरी महाराणा प्रताप के बारे में बोलने का अवसर मिल रहा है जिसका नाम लेते ही शिराओं में रक्त का संचार तीव्र हो जाता है। वह नाम, जिसने महलों के वैभव को ठुकरा कर जंगलों की खाक छानना स्वीकार किया, लेकिन किसी भी विदेशी आक्रांता के आगे अपना मस्तक झुकाना स्वीकार नहीं किया। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि हमें किताबों में पढ़ाया गया कि अकबर महान था परंतु अकबर तो गुलामी की चाशनी में डूबी हुई लेखनी लिखती थी, महान अकबर नहीं महान महाराणा प्रताप है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इतिहास की उन तमाम किताबों को फाड़ डालों जिनपर अकबर महान लिखा है और अपने खून की स्याही से जगह-जगह महाराणा प्रताप महान लिख दो। आजादी के बाद जो सरकार आई वह गुलामी की मानसिकता में डूबी रहीं और अकबर महान लिखती रही। मगर आज के बाद महाराणा प्रताप ग्रेट लिखा जाएगा।
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बदल गई मंत्रियों की ‘जिला ड्यूटी’
पश्चिम बंगाल में पहली बार ऐतिहासिक जीत के बाद जहां फुल वाला दल इब पड़ोसी राज्य पंजाब के मिशन में जुट गया है। वहीं, हरियाणा में भी दल की ओर से नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी के चलते फुल वाले दल ने अपने मंत्रियों की जिला ड्यटी में बड़ा बदलाव किया है। हरियाणा सरकार के बड़े साहब यानि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों को नए सिरे से जिलों का आवंटन किया गया है। इस बदलाव में कई मंत्रियों के पुराने जिले बदल दिए गए हैं, जबकि कुछ को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रदेश की राजनीतिक चौपालों पर चर्चा है कि प्रदेश में जिला जनसंपर्क एवं कष्ट निवारण समितियां लंबे समय से सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद का प्रमुख माध्यम रही हैं। इन समितियों की बैठकों में मंत्री जिलों में पहुंचकर आम लोगों की शिकायतें सुनते हैं और अधिकारियों को मौके पर समाधान के निर्देश देते हैं। अब सरकार ने प्रशासनिक संतुलन और बेहतर निगरानी को ध्यान में रखते हुए जिलों का नया बंटवारा किया है। राजनीतिक जानकार इस बदलाव को सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं मान रहे। उनका कहना है कि जिलों के नए आवंटन के जरिए सरकार क्षेत्रीय संतुलन, प्रशासनिक पकड़ और राजनीतिक सक्रियता को भी साधने की कोशिश करती है। सरकार अब जिलों में अपनी सीधी मॉनिटरिंग को और मजबूत करना चाहती है। ऐसे में ग्रीवेंस कमेटियों के जरिए मंत्रियों की सक्रियता आने वाले समय में और बढ़ती दिखाई दे सकती है। आपकों बता दें कि जिला जनसंपर्क एवं कष्ट निवारण समितियां राज्य सरकार की महत्वपूर्ण व्यवस्था मानी जाती हैं। इन बैठकों में बिजली, पानी, सड़क, राजस्व, पुलिस, पेंशन, राशन, नगर निकाय और अन्य विभागों से जुड़ी शिकायतों पर सुनवाई होती है। मंत्री संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में मामलों की समीक्षा करते हैं और मौके पर समाधान के निर्देश जारी करते हैं। सरकार का मानना है कि जिलों में समय-समय पर जिम्मेदारियों में बदलाव से प्रशासनिक निगरानी मजबूत होती है और नए दृष्टिकोण के साथ शिकायत निवारण प्रक्रिया को गति मिलती है।
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मोदी की अपील का असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए गए आह्वान के मद्देनजर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकारी वाहनों के सीमित उपयोग और ईंधन संरक्षण को लेकर उचित कदम उठाने बारे निर्देश दिए थे। इसके चलते जहां मुख्यमंत्री ने अपने काफिले में कटौत की, वहीं मंत्री भी अपने-अपने स्तर पर ईंधन बचत के उपाय अपना रहे हैं। इसी के चलते प्रदेश के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा ने दोनों विभागों को लेकर इस बाबत सरकारी वाहनों के उपयोग को लेकर प्रभावी कार्रवाई करते हुए बड़ा कदम उठाया है। मंत्री कार्यालय की ओर से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में कुल 9 तथा लोक निर्माण विभाग में कुल 8 वाहनों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने के आदेश जारी किए गए हैं। ये गाड़ियां विभाग के मुख्यालय तथा संबंधित विभाग में इस्तेमाल में थी। उन्होंने खुद के साथ चलने वाली पायलट गाड़ी को भी हटवा दिया है। पहले उनके साथ पायलट गाड़ी भी चलती थी।
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...लो जी हो गया पेट्रोल-डीजल महंगा
पश्चिम एशिया में चल रहे भारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल के बाद आखिरकार देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हो गया है। नई दरों के अनुसार, तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में सीधे 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। 2022 के बाद हुई इस सबसे बड़ी बढ़ोतरी का सीधा और व्यापक असर हरियाणा की जनता पर भी पड़ा है। आम आदमी, व्यापारी और किसान सभी इस नई महंगाई से चिंतित हैं। हरियाणा के विभिन्न शहरों जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, हिसार और अंबाला में पेट्रोल और डीजल के दामों में इस बढ़ोतरी के बाद आवाजाही और माल ढुलाई महंगी होना तय है। किसानों पर दोहरी मार पड़ेगी क्यूंकि हरियाणा एक प्रमुख कृषि राज्य है। गर्मी के मौसम में सिंचाई और कृषि उपकरणों के लिए डीजल की भारी मांग होती है। डीजल में 3 रुपये का उछाल किसानों के लिए खेती की लागत को काफी बढ़ा देगा। नौकरीपेशा और दैनिक यात्री की बात करें तो  दिल्ली-एनसीआर से सटे इलाकों  में रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों का मासिक परिवहन बजट अब बढ़ जाएगा।
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हरियाणा ने रचा इतिहास, देश में हासिल किया दूसरा स्थान
एनिमिया मुक्त भारत मुहिम में हरियाणा ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। पिछले साल हरियाणा पांचवें स्थान पर था। हरियाणा ने एएमबी इंडेक्स में 86.5 अंकों के साथ शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। यह उपलब्धि बहुआयामी रणनीति का परिणाम है। इसके तहत एनीमिया उन्मूलन माह के दौरान विशेष अभियान, 100 दिवसीय एनीमिया नियंत्रण अभियान और राज्य द्वारा विकसित एनीमिया ट्रैकिंग वेब एप्लीकेशन के माध्यम से डाटा प्रबंधन किया गया। एएमबी स्कोर कार्ड केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी किया जाता है जिसमें आयरन और फोलिक एसिड की कवरेज को पांच प्रमुख वर्गों 6 से 59 माह के बच्चे, 5 से 9 वर्ष के स्कूली बच्चे, 10 से 19 वर्ष के किशोर, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताओं में मापा जाता है। हरियाणा उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहां लगातार कई वर्षों से 5-9 वर्ष के बच्चों और गर्भवती महिलाओं में 95 प्रतिशत तक की उच्चतम कवरेज बनी हुई है। स्तनपान वाली माताओं में फोलिक एसिड कवरेज 2024-25 के 72.3 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 72.8 प्रतिशत हो गई है। राष्ट्रीय औसत 65.4 के मुकाबले 86.5 अंकों का एएमबी इंडेक्स हरियाणा को देश के शीर्ष राज्यों में शामिल करता है।  
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बिन फेरे हम तेरे !
हरियाणा की इस अनोखी शादी में ना बैंड-बाजा, ना फिजूलखर्ची और ना ही पारंपरिक फेरों का आयोजन किया गया। स्टेज पर दूल्हा-दुल्हन ने गुलाब के फूल की बजाय एक-दूसरे को कलम भेंट कर शिक्षा और जागरूकता का संदेश दिया। दूल्हा मनेंद्र दहिया और दुल्हन मोनिका तंवर पेशे से काउंसलर हैं। दोनों का कहना है कि शादी केवल सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि विश्वास और जिम्मेदारी का रिश्ता है।
दूल्हा-दुल्हन दोनों ने विवाह से पहले स्वास्थ्य जांच को प्राथमिकता दी। दूल्हा मनेंद्र दहिया ने कहा कि "युवाओं को बिना झिझक स्वास्थ्य संबंधी जांच करवानी चाहिए, ताकि भविष्य सुरक्षित और स्वस्थ रह सके। वहीं मोनिका तंवर ने कहा कि "एचआईवी जैसे विषयों पर समाज में आज भी खुलकर बात नहीं होती, जबकि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।" आज शादियां दिखावे का माध्यम बनती जा रही हैं, जबकि जरूरत सादगी और जागरूकता को बढ़ावा देने की है। इस अनूठी शादी को लोग इसे नई सोच की शादी और समाज को आईना दिखाने वाली पहल बता रहे हैं। स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।" हरियाणा के चरखी दादरी में अनोखी शादी चर्चा का विषय बन गई है। यहां एक नवदंपति ने पारंपरिक रस्मों और दिखावे से अलग हटकर विवाह से पहले एचआईवी टेस्ट करवाया और रिपोर्ट सामान्य आने के बाद डॉक्टर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर के सामने एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया। इस अनोखी शादी की सबसे खास बात ये रही कि समारोह पूरी तरह दहेज मुक्त और सादगीपूर्ण रहा।
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राजनीति के पीएचडी नेता पर थम ही गया विवाद
हरियाणा में राजनीति की पीएचडी कहे जाने वाले नेता पर पिछले दिनों शुरू हुआ विवाद अब थम गया है। इस विवाद को लेकर जहां सत्तासीन फुल वाले दल के नेताओं के भी विरोधाभासी बयान सामने आ रहे थे। वहीं, अब सरकार के बड़े साहब यानि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि चौधरी भजनलाल हरियाणा की राजनीति के बेहद सम्मानित नेता रहे हैं और प्रदेश को आगे बढ़ाने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चौधरी भजनलाल की कार्यशैली हमेशा जनहित और विकास केंद्रित रही। चौधरी भजनलाल हमारे लिए बहुत सम्मानित हैं। हम सब उनका बहुत सम्मान करते हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान को बीजेपी की ओर से बिश्नोई समाज को सकारात्मक संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है। आपको बता दें कि हाल ही में राज्यसभा सदस्य रेखा शर्मा के एक बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में विवाद खड़ा हो गया था। विपक्षी दलों के साथ-साथ बिश्नोई समाज के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे चौधरी भजनलाल के सम्मान से जोड़ते हुए नाराजगी जताई थी। इसी कड़ी में सांसद रेखा शर्मा ने भी अपने बयान पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि उनका वक्तव्य किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक व्यवस्था के संदर्भ में दिया गया था। रेखा शर्मा ने स्पष्ट किया कि चौधरी भजनलाल जमीनी और सम्मानित मुख्यमंत्री रहे हैं। बीजेपी नेता कुलदीप बिश्नोई ने पूरे मामले में संतोष जताते हुए अपने समर्थकों से भावनात्मक अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और सांसद रेखा शर्मा द्वारा स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद अब सभी मतभेद समाप्त कर संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
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इब ट्रिपल इंजन से होगा विकास !
हरियाणा के सात शहरी निकायों के चुनाव में छह में भाजपा ने जीत का परचम लहराया है। सोनीपत, पंचकूला और अंबाला नगर निगमों के साथ रेवाड़ी नगर परिषद, धारूहेड़ा और सांपला नगरपालिकाओं में भाजपा उम्मीदवार चुनाव जीते हैं, जबकि हिसार की उकलाना नगरपालिका में कांग्रेस व इनेलो समर्थित 22 वर्षीय निर्दलीय उम्मीदवार ने चुनाव जीता है। हरियाणा सरकार के बड़े साहब यानि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह जीत जनता के भरोसे की जीत है। राज्य में 11 नगर निगम हैं। पहले से आठ नगर निगमों में भाजपा के मेयर हैं। अब सभी नगर निगमों में केंद्र व राज्य के साथ मिलकर ट्रिपल इंजन की सरकार काम करेगी। उन्होंने कहा कि शहरी निकायों में विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। 
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दुबई से आए 21 साल के पार्थ ने रचा इतिहास
हरियाणा की राजनीति में इन दिनों एक युवा चेहरे की खूब चर्चा हो रही है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता ज्ञानचंद गुप्ता के 21 वर्षीय पोते पार्थ गुप्ता ने पंचकूला नगर निगम चुनाव के वार्ड नंबर 6 से शानदार जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ ही पार्थ पंचकूला के इतिहास में सबसे कम उम्र के पार्षद बन गए हैं। इस जीत को ज्ञानचंद गुप्ता द्वारा अपने पोते की सफल 'राजनीतिक लॉन्चिंग' के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह रही कि इस चुनाव में ज्ञानचंद गुप्ता को खुद जमीन पर उतरकर घर-घर जाकर वोट मांगने पड़े। पिछले 11 वर्षों से पंचकूला की राजनीति में 'सुपर पावर' माने जाने वाले गुप्ता पहली बार गली-गली हाथ जोड़ते नजर आए। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस चुनाव ने उन्हें सबको साथ लेकर चलने का सबक भी सिखाया है। विदेश से पढ़ाई पूरी कर लौटे पार्थ गुप्ता का दावा है कि एक युवा होने के नाते वह युवाओं की समस्याओं को बेहतर समझते है। 

पीएम की अपील पर सीएम ने भी काफिला किया छोटा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई अपील का असर हरियाणा में साफ-साफ दिखाई दे रहा है। जहां मुख्यमंत्री  नायब सैनी ने अपने काफिले से लगभग आधे वहां हटा दिए हैं। वहीं सहकारिता मंत्री अरविंद शर्मा ने साइकिल चलाकर इस  मुहिम को आगे बढ़ाया। इसके अलावा केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल व मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी भी आमजन की तरह ट्रेन से सफर करते नजर आए। 

पर्यावरण के लिए भी लाभकारी

जिस प्रकार से मुख्यमंत्री, मंत्री सहित अन्य ब्यूरोक्रेट्स के वाहनों का लंबा चौड़ा कारवां सीमित हो गया है।ऐसे में वित्तीय लाभ ही नहीं बल्कि पर्यावरण के लिए भी अप्रत्यक्ष रूप से यह कदम बड़ा ही  हितकारी रहेगा। क्योंकि अक्सर बड़े नेता और अधिकारी जहां सरकारी कार्य योजनाओं को आगे बढ़ाने और अन्य कार्यक्रमों को गति देने के अलावा राजनेता प्रदेश में आए दिन कहीं ना कहीं राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी शिरकत करते रहते हैं जहां उनके साथ उनके समर्थकों का भी हुजूम रहता है। ऐसे में वाहनों की संख्या घटने से समर्थक भी नेताओं के साथ चलने से परहेज करेंगे। जिसके कारण प्रदेश में आए दिन इनके साथ चलने वाले सैकड़ो वाहनों के पहिए थमने से प्रदूषण निश्चित तौर पर कम होगा।
 
प्रस्तुति: चन्द्र शेखर धरणी